कविता – शहर,गाँव से बहुत अच्छा है

सलिल सरोज, नई दिल्ली (nainilive.com)- 
इस शहर में अँधेरा बहुत है
पर दीए से सहर होता नहीं
मरहमी सी शांति है जरूर
पर चैन से बसर होता नहीं
बिखेर रखे हैं दौलत बेशुमार
पर कोई तो असर होता नहीं
जिस्म दुहरा हुआ जाता है
पर दर्द में कसर होता नहीं
शहर,गाँव से बहुत अच्छा है
पर कभी मुझे नज़र होता नहीं
* लेखक परिचय

सलिल सरोज

जन्म: 3 मार्च,1987,बेगूसराय जिले के नौलागढ़ गाँव में(बिहार)।

शिक्षा: आरंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, तिलैया, कोडरमा,झारखंड से। जी.डी. कॉलेज,बेगूसराय, बिहार (इग्नू)से अंग्रेजी में बी.ए(2007),जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय , नई दिल्ली से रूसी भाषा में बी.ए(2011),  जीजस एन्ड मेरीकॉलेज,चाणक्यपुरी(इग्नू)से समाजशास्त्र में एम.ए(2015)।

प्रयास: Remember Complete Dictionary का सह-अनुवादन,Splendid World Infermatica Study का सह-सम्पादन, स्थानीय पत्रिका"कोशिश" का संपादन एवं प्रकाशन, "मित्र-मधुर"पत्रिका में कविताओं का चुनाव।

सम्प्रति: सामाजिक मुद्दों पर स्वतंत्र विचार एवं ज्वलन्त विषयों पर पैनी नज़र। सोशल मीडिया पर साहित्यिक धरोहर को जीवित रखने की अनवरत कोशिश।

ई-मेल:salilmumtaz@gmail.com

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