दलितों ने हनुमान मंदिरों पर किया कब्जा,शंकराचार्य भी कूदे विवाद में

नई दिल्ली (nainilive.com)- यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के द्वारा बजरंगबली को दलित बुलाए जाने के बाद देश के सियासी गलियारों में घमासान मचा हुआ है. अब इस मामले दलित समाज के लोगों ने जहां आगरा के एक हनुमान मंदिर पर कथित तौर पर कब्जा कर लिया वहीं, इस विवाद में शंकराचार्य भी कूद पड़े. उन्होंने योगी आदित्यनाथ की कड़े शब्दों में निंदा की है. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर ने दलित समाज से देशभर के सभी हनुमान मंदिरों पर कब्जा करने और वहां का पुजारी बनने का आह्वान किया है. इस बीच शनिवार को योग गुरु बाबा रामदेव ने भी हनुमान को लेकर बयान दिया. उन्होंने हनुमान को ज्ञानी और क्षत्रिय बताया.मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आगरा में कांग्रेस नेता अमित सिंह के साथ दलित समाज के लोगों ने शहर के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध हनुमान मंदिर पर अपना दावा ठोक दिया. मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और ऐलान किया गया कि अब हनुमान मंदिर के पुजारी और व्यवस्थापक दलित समाज के लोग होंगे.

कांग्रेस नेता अमित सिंह ने खुद को दलित बताते हुए कहा कि अब से अपनी जाति के देवता हनुमान के सभी मंदिरों में हम ही पूजा करेंगे और इनके हम ही महंत होंगे. इतना ही नहीं बल्कि सभी को जनेऊ धारण कराया गया और संकल्प लिया गया कि देश में जितने भी हनुमान मंदिर हैं, उनका रखरखाव और पूजा करने वाला अब अनुसूचित जाति का व्यक्ति ही होगा. अखिल भारतीय कोली समाज के उपाध्यक्ष नंदलाल ने कहा कि हम मुख्यमंत्री योगी से यह भी निवेदन करते हैं कि बता दें कि कौन-कौन से दूसरे भगवान हमारे समाज से आते हैं.इतना ही नहीं आपको बता दें कि शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने भगवान हनुमान को ब्राह्मण बताया है. बजरंगबली की जाति को लेकर शंकराचार्य ने कहा कि तुलसीदास ने हनुमान के बारे में लिखा है कि कांधे मूज जनेऊ साजे, इसका सीधा अर्थ है कि वह ब्राह्मण थे न कि दलित. उन्होंने जबलपुर में कहा कि बीजेपी राम मंदिर के निर्माण को लेकर ईमानदार नहीं है. वह सिर्फ 2019 के लोकसभा चुनाव में लाभ हासिल करने के लिए राम मंदिर के मुद्दे को उछाल रही है. उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में दलित शब्द था ही नहीं. सबसे पहले महात्मा गांधी ने वंचित वर्ग को हरिजन कहकर पुकारा और बाद में मायावती ने दलित शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

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