महाभियोग प्रस्ताव का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश व दूसरे जजों को डराना था: जेटली

नई दिल्ली ( nainilive.com desk)-  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि महाभियोग प्रस्ताव अपुष्ट आधारों पर रखा गया और इसका उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश व दूसरे जजों को डराना था: जेटली ने कहा, देश के मुख्य न्यायधीश के खिलाफ गलत सोच से लाया गया महाभियोग प्रस्ताव इस बात का उदाहरण है कि वकालत करने वाले सांसद न्यायालय के भीतर के झगड़े को खींच कर संसद तक ला रहे हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि संसद अपने कार्य क्षेत्र में सर्वोच्च है, संसद की प्रक्रिया को समीक्षा के लिए न्यायालय में नहीं ले जाया जा सकता.

आपको बता दें कि उप राष्ट्रपति वेकैंया नायडू ने एक दिन पहले कांग्रेस सहित सात विपक्षी पार्टियों की ओर से दिए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया था. कांग्रेस ने उनके फैसले को ‘अवैध’ और ‘जल्दबाजी’ में उठाया गया कदम बताया था. कांग्रेस ने कहा है कि वह उप राष्ट्रपति के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार नहीं चाहती कि कदाचार के जो आरोप सामने आए हैं, उनकी जांच हो.

कांग्रेस ने यह भी उम्मीद जतायी कि उच्चतम न्यायालय में मामला जाने पर इससे प्रधान न्यायाधीश का कोई लेनादेना नहीं रहेगा और इसके संवैधानिक पहलुओं पर गौर किया जाएगा. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि सभापति ने कोई जांच कराए बिना ही इस नोटिस को खारिज कर दिया. यह असंवैधानिक, गैरकानूनी, गलत सलाह पर आधारित और जल्दाबाजी में लिया गया फैसला है.

वहीं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायूड ने कहा कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने का फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया गया. उन्होंने कहा कि यह फैसला एक महीने तक ‘पूरी तरह सोच विचार’ करने के बाद लिया गया. उन्होंने कहा कि सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस खारिज करने का फैसला पूरी तरह संविधान एवं न्यायाधीश जांच अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप था. सीजेआई के महाभियोग पर विपक्ष के प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करने पर वेंकैया नायडू ने कहा कि मैंने अपनी जिम्मेदारी निभाई. मैंने अपना काम किया और मैं इससे पूरी तरह से संतुष्ट हूं.

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