संस्कृत निदेशालय, उत्तराखण्ड में भी शुरू हुआ संस्कृत सप्ताह

देहरादून (nainilive.com)-  संपूर्ण भारत में मनाये जा रहे संस्कृत सप्ताह के क्रम में संस्कृत शिक्षा निदेशालय उत्तराखण्ड द्वारा भी संस्कृत सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है।   इस संदर्भ में संस्कृत शिक्षा निदेशक आर.के. कुँँवर की ओर से जारी आदेश में संस्कृत से संबंधित सभी शिक्षण संस्थाओं में संस्कृत सप्ताह मनाए जाने हेतु निर्देश दिये गये हैं।
उत्तराखंड सरकार द्वारा संस्कृत को द्वितीय राजभाषा के रूप में मान्यता होने के क्रम में संस्कृत को लोक व्यवहार में प्रयोग किए जाने हेतु तथा समस्त संस्कृत शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं में संस्कृत भाषा एवं संभाषण की दक्षताओं एवं कौशलों के विकास के लिए  संस्कृत सप्ताह में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने के लिए कहा गया है, ताकि विद्यालयों में संस्कृतमय वातावरण का निर्माण किया जा सके।
छात्र- छात्राओं में संस्कृत भाषा कौशलों के विकास के लिए संस्कृत समूहगान,  संस्कृत एकल गान,  संस्कृत नृत्य,  संस्कृत नाटक, संस्कृत संभाषण,  वाद-संवाद, लघु कथा कथन,  संस्कृत सुलेख, संस्कृत सूक्ति पत्रिका लेखन, संस्कृत सुभाषित  लेखन, ग्रीटिंग कार्ड लेखन,  संस्कृत संभाषण शिविर एवं शोभायात्रा आदि कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए  कहा गया है ।  सहायक निदेशक भूपेन्द्र सिंह, बर्षा गौनियाल एवं  संजू प्रसाद ध्यानी को विभिन्न जनपदों में स्थित शिक्षण संस्थाओं में कार्यक्रमों के पर्यवेक्षण के लिए आदेशित किया है।
विदित हो कि  23 अगस्त 2018 से 29 अगस्त 2018 तक संस्कृत सप्ताह मनाया जाएगा ।  इसी बीच 26 अगस्त  को श्रावण पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन के दिन  संस्कृत दिवस भी मनाया जाएगा। संस्कृत दिवस से 3 दिन पूर्व एवं 3 दिन पश्चात तक कुल 7 दिनों को संस्कृत सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।प्राचीन भारतीय  संस्कृति में  संस्कृत दिवस  यानी कि श्रावण पूर्णिमा का विशेष महत्व है । प्राचीन वैदिक गुरुकुलों में श्रावण पूर्णिमा के दिन गुरु के द्वारा शिष्यों का  यज्ञोपवीत संस्कार एवं वेदारंभ संस्कार  इसी श्रावण पूर्णिमा के दिन ही होता था।  इस दिन से नवागंतुक छात्र-छात्राएं गुरुकुल में वेद अध्ययन प्रारंभ करते थे तभी स से ही श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रुप में मनाए जाने की परंपरा रही है।  विभिन्न राज्य सरकारों एवं केंद्र सरकार के द्वारा भी विगत अनेक वर्षों से श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में मान्यता दी गई है।  वर्ष 2001 में अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने संम्पूर्ण वर्ष को संस्कृत वर्ष घोषित किया था एवं संस्कृत दिवस एवं संस्कृत सप्ताह को भी  व्यापक रूप में बनाए जाने की घोषणा की थी। तभी से निरंतर प्रतिवर्ष संस्कृत सप्ताह केंद्र सरकार की ओर से एवं विभिन्न राज्य सरकारों तथा  विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से भी उत्साह पूर्वक मनाया जा रहा है।

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