२१वी सदी के भारत की परिकल्पना की प्राप्ति संस्कृति एवं विचारों से ही संभव – भुवन जी

नैनीताल ( Nainilive.com ) – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नैनीताल द्वारा आज आर्य समाज मंदिर नैनीताल में मातृ शक्ति सम्मलेन कार्यक्रम का आयोजन किया गया . कार्यक्रम के मुख्य वक्त श्री भुवन जी , प्रान्त संगठन मंत्री , विद्या भारती एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता भगिनी श्रीमती शुभा कंसल के द्वारा की गयी . कार्यक्रम के सम्बोधन में मातृ शक्ति को सम्बोधित करते हुए भुवन जी द्वारा हिन्दू संस्कृति एवं धर्म के द्वारा परिवार में माँ का स्थान एवं उनके द्वारा परिवार एवं समाज को सुसंस्कृत करने के महत्त्व को लेकर अपना व्याख्यान दिया. उन्होंने बताया की आज बच्चों में बढ़ते मोबाइल और इंटरनेट के प्रयोग ने संस्कारों को काम कर दिया है. आज परिवारों के मध्य अशांति का मुख्य कारण भी बढ़ता मोबाइल का चलन है.

 

आज की युवा पीढ़ी का संस्कारों से विमुख होना और संस्कृति का ज्ञान न होना भी चिंता का विषय है.  उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया की कैसे भारत की अखंडता को विखंडित करने के लिए मैकॉले ने देश की शिक्षा पद्यति को अपना निशाना बनाया और बढे ही सुनियोजित तरीके से धर्म और संस्कृति को बदलने की कोशिश की गयी. गीता , वेदों, योग , आयुर्वेद  और धर्म से लोगो को एक बड़े ही सुनियोजित तरीके से दूर करने का प्रयास इस शिक्षा पद्यति के माध्यम से किया गया और भारतीयता को अंग्रेजियत में परिवर्तित कर अंग्रेजी भाषा को जीवन का अभिन्न अंग बना डाला है. उन्होंने आह्वान किया की अगर भारत की आत्मा को बचाना है तो अपनी धर्म , संस्कृति को मातृ शक्ति के माध्यम से फैला कर ही प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा की अगर भारत को श्रेष्ठ राष्ट्र बनाना है तो अभी से मातृ शक्ति को बच्चों में अपने धर्म, संस्कृति एवं विचारों के बीज को बोना पड़ेगा और तभी हम २१वी सदी के भारत की परिकल्पना को प्राप्त कर सकेंगे.

कार्यक्रम में श्री मनोज जी, जिला प्रचारक, नैनीताल, श्री सुभम जी, नगर प्रचारक , नैनीताल , श्री के . पी काला जी, विभाग कार्यकारणी सदस्य, श्री राजेंद्र जी, सह विभाग कार्यवाह, श्री सुयश पंत जी , नगर कार्यवाह, दरबान सिंह गैड़ा , सर्व प्रिय कंसल, दया किशन पोखरिया, मोहन चंद्र पांडेय, राम सिंह रौतेला , नवीन भट्ट, दीपक मेलकानी, कैलाश पाठक, भरत महरा , मोहित जी, अंचल पंत ,  योगेश जोशी , उमेश जी, शंकर चौहान  सहित काफी संख्या में मात्र शक्ति उपस्थित थी.

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