रामनगर में अल्पसंख्यक उत्पीडन के 33 शिकायती प्रकरणो एवं वादों की हुई सुनवाई, 14 मामलों का निस्तारण

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रामनगर ( nainilive.com )- अध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग उत्तराखण्ड डा0 आरके जैन की अध्यक्षता में सोमवार को रामनगर नगरपालिका सभागार में अल्पसंख्यक उत्पीडन के सम्बन्धित 33 शिकायती प्रकरणो एवं वादों की सुनवाई की गई जिसमे से 14 मामलों का निस्तारण मौके पर ही किया गया तथा 10 मामलों का अनुस्मारक पत्र जारी किया गया। सुनवाई में उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब, सदार इकबाल सिंह व आयोग के सदस्य मौजूद थे।


उपाध्यक्ष अल्पसंख्यक आयोग मजहर नईम नवाब ने बताया कि शहॉजहा बेगम डाक बंगल भीमताल के प्रकरण मे जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में पुलिस की शिकायतो पर सही तरीके से जांच नही की गई। सुनवाई करते हुये आयोग द्वारा निर्देशित किया गया कि पुनः जांच करते हुये पीडिता के पक्ष के सबूतो को ध्यान मे रखते हुये जांच की जाए। शराफत हुसैन निवासी ला0न-16 आजाद नगर हल्द्वानी के पुत्री की मृत्यु बिजली के तारों से करंट लगने से हुई। जिसमें मुख्य अभियन्ता कुमाऊं विद्युत विभाग को उपस्थित ना होने पर नोटिस जारी किया गया। नोटिस मे 30 नवम्वर तक देहरादून कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण दें। बबीया परवीन निवासी सावत्री कालोनी हल्द्वानी के पति ओखलकाडा मे शिक्षक के पद मे नियुक्त हैं जिनकी दोनो किडनी खराब हो गई है। जिनका आयोग के निर्देश पर अटेचमैंट हल्द्वानी बनभूलपुरा स्कूल मे किया गया है ताकि पीडिता अपना डायलेसिस करा सके इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। सलीम सैफी व रईस अहमद निवासी इन्दा नगर द्वारा शिकायती नजूल भूमि पर जो राज्य सरकार की है तथा प्रबंधक नगर निगम हल्द्वानी है। उन्होने बताया कि स्कूल, नलकूप, ओवरहैड टैंक, बिजलीघर सीवर लाइन आदि के लिए नगर निगम द्वारा अनापत्ति प्रमाण दिये गय है। फिर रेलवे उक्त जमीन पर मालिका हक क्यो नही दिखा रही हैै। आयोग ने सख्त नाराजगी व्यक्ति की। और निर्देश दिये कि 15 दिनो के भ्ीातर सीमांकन करें। अन्यथा सम्बन्धित विभाग के विरूद्व सख्त कार्यवाही की जायेगी।


उपाध्यक्ष नवाब ने बताया कि 14 मामलो का आयोग द्वारा निस्तारण किया गया। जिसमेे जनपद नैनीताल के 06 मामले जनपद उधमसिह नगर के 08 मामलों का निस्तारण किया। उन्होने बताया एक प्रकरण मो. साहिल पुत्र मेहबूब निवासी पप्पू का बगीचा बनभूलपुरा मे पूर्व थानाध्यक्ष सुशील कुमार द्वारा पीडित की उत्पीडन की शिकायत पर जांच कोतवाल हल्द्वानी को कराई गई थी। जिसमें कोतवाल द्वारा जांच झूठी व बेबूनियाद पायी गई व झूठा मुकदमा पीडित के खिलाफ कराया गया। आयोग द्वारा सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक नैनीताल को सम्बन्धित प्रकरण मे विभागीय कार्यवाही कर आयोग को प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराने के निर्देश दिये गये।

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