सुरों के पवन ने संगीत का तूफान बन शहर को किया गौरवान्वित

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-छोटी सी उम्र मे हुनर का जादू दिखा नैनीतालवासियो को दीवाना बना दिया था

बबलू चंद्रा , नैनीताल ( nainilive.com )- होनहार बिरवान के होत चिकने पात महज 11 वर्ष की उम्र मे तबले की थाप के साथ नैनीताल मे सुरों की महफ़िल सजा देने वाले इंडियन आइडल के विजेता पवनदीप राजन को संगीत के सम्राट का सरताज मिलने से उत्तराखंड सहित नैनीतालवासी भी गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। कहते है पूत के पांव पालने मे दिख जाते है इस कहावत को सिद्ध कर दिखाया उत्तराखंड के चंपावत जिले के छोटे से गाँव वल्चौड़ा से नन्हे कदमो ने जब देश के सबसे बड़े संगीत के मंच तक सफर तय कर अपने हुनर का जादू दिखा, विजेता ट्राफी पर कब्जा जमाया।


नैनीताल मे 2009 मे शरदोत्सव के मंच मे कुमाऊ अंचल से लोक गायक सुरेश राजन के 11 वर्ष के पुत्र का सोलो संगीत के साथ मंच मे प्रवेश ही था कि उम्र को देख दर्शकों ने दांतो तले उंगली दबा दी थी, पवनदीप के तबले की थाप और सुरों के अलाप ने महफ़िल सजाई तो नैनीताल वासियो को झूमने के लिए मजबूर कर दिया था। घंटे भर की प्रस्तुति ओर हजारो दर्शकों को नाचने मे मजबूर कर देने वाले पवन के हुनर को देख सबकी जुबां मे यही था कि बालक उत्तराखंड मे गीत-संगीत का नया कीर्तिमान रचेगा।

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2016 मे विंटर कार्निवाल के सांस्कृतिक सचिव त्रिभुवन फर्त्याल ने बताया कि पवनदीप की प्रतिभा से आकर्षित होकर उन्हें कार्निवाल मे पुनः जब सोलो परफॉरमेंस मे आमंत्रित किया गया। तब शहरवासी बचपन के हुनर को भूले भी नहीं थे कि उनके शो को देखने चले आये थे, और पवनदीप का निखरा हुनर मुख्य मंच मे आया तो स्टार नाइट मे किशोर कुमार, सुरेश गायकवाड़ और मोहम्मद रफी के सुरीले तरानो से इस बार एक अलग छाप छोड़ते हुए, स्टार नाइट मे चार चांद लगा दिये।

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तत्कालीन पालिकाध्यक्ष मुकेश जोशी मंटू के अनुसार शरदउत्सव का एक उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओ को एक मंच प्रदान कर भविष्य के सुनहरे सफर के लिए प्रोत्साहित कर आगे बढ़ने का निरंतर प्रयास करता आया था। जिसके तहत ही उन्होंने पवनदीप को शरदोत्सव मे आमंत्रित किया था। इसके साथ ही वे अन्य स्थानीय कलाकारों को भी मंच प्रदान करते आये हैं। पवनदीप के संगीत की दुनिया मे उत्तराखंड व कुमाऊँ का नाम रोशन करने पर उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए बधाई दी।

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वहीं त्रिभुवन फर्त्याल ने भी बधाई देते हुए कहा है कि ऐसी प्रतिभाओं को हमेशा मंच प्रदान किये जाने चाहिए जिससे अन्य क्षेत्रों के कलाकार भी आगे चल कर उत्तराखंड व क्षेत्र का नाम रोशन कर सके। यहॉ बता दे कि पवनदीप के इससे पूर्व 2015 मे द वॉइस ऑफ इंडिया का खिताब भी जीत चुके हैं, वही गानों के साथ ही तबला, हारमोनियम, पियानो, गिटार सहित अन्य म्यूजिकल इंस्ट्रमेंट बजा लेते है। उनकी नानी, नाना दादा भी गायकी मे प्रसिद्ध लोक कलाकार रह चुके हैं। उनकी बहन ज्योतिदीप व ताऊ सतीश भी गायक हैं। इंडियन आइडल के प्रबल दावेदार के साथ ग्रैंड फिनाले का खिताब जीतने पर नैनीतालवासियो ने भी गौरवान्वित होकर पवनदीप को बधाइयाँ दी हैं।

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