Exclusive : सौंदर्य की देवी वीनस एवं भूमि पुत्र मंगल का मिलन , ग्रहों की पाश्चात्य रोचक जानकारी

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बबलू चन्द्रा , नैनीताल ( nainilive.com )- ब्रह्मांड और हमारे आकाश मे होने मे खगोलीय घटनाएं नित नई नहीं है, इनकी बुनियादें बातें व जानकारी तो हज़ारो साल पहले ही जान ली गई थी, रोमन लोग वीनस ( यूनानियों की एफ्रोडाइट) बुलाते थे, भारत मे शुक्र दैत्यगुरु है। पर वीनस सौंदर्य की देवी है। यूनानी नाम कुप्रोस था। ऋग्वेद मे श्लोक है अयं वेनश्चोदयत पृश्निगरभा, ज्योतिजरायू रजसो विमान वेंन शब्द आकाश की चमकीली ज्योति वीनस के लिये कहा गया जो सूर्यकीर्णरूपी, पृथिवीवतस्प्रेरक प्रकाश से उदित हुआ है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का मत था कि वेन ओर वीनस व कुप्रिस व शुक्र एक ही शब्द के घोतक है। इससे ये सिद्ध होता है कि लगभग चार हजार पूर्व वर्ष पहले यूनानियों ओर भारतीयों आर्यों के पूर्वज शुक्र ग्रह को पहचानकर इसका नामकरण संस्कार कर चुके थे जिन्हें आज भी हम इसी वीनस, शुक्र, सुकुवा नाम से जानते है। वहीं मंगल ने भी प्राचीन काल से ही मानव को सबसे अधिक आकर्षित किया है। इसके लाल रंग के कारण प्राचीन साहित्य मे इस ग्रह को अंगारक व लोहितांग जैसे नामों से जाना जाता था। सालो पहले इसकी वक्री चाल को पहचान कर इसे एक अनिष्टकारी ग्रह का दर्जा दे दिया गया था।

महाभारत मे कहा गया- प्रत्यागतय पुनजिश्रुंजर्घ्नये संशप्तकाल बहूंनः। वक्रतिवक्ररगमनादण्डरक इव ग्रहः ।। अर्थात (मंगल ग्रह की संज्ञा देते हुए कहा गया ) जैसे मंगल ग्रह तीव्र वक्र गति से चलता हुआ अनिष्टकारी होता है, ठीक वैसे ही विजयी अर्जुन ने दंडधार की सेना से वापस लौट कर बहुत से संसप्तको का संहार शुरू कर दिया था। कालिदास ने भी मालविकाग्निमित्र के तीसरे संस्करण मे इसकी वक्री चाल का जिक्र किया है। भारतीय आख्यानों मे मंगल को भूमि-पुत्र ( भौम) ओर यूनानी कथाकारों ने लाल रंग का ग्रह रोमन मार्स व यूनानी आरेस मतलब युद्ध का देवता कहा है।

पाश्चात्य खगोल-विज्ञान मे इसका नाम एंटाआरेस है जो एक तारे के समान है जिसका रंग भी लाल है। एंटाआरेस मतलब मंगल का प्रतिद्वंदी है।
वैज्ञानिको की नित नई खोजों, उपलब्धियों व ग्रहों पर उतारे गए अंतरिक्ष यानो वीनस 4 से वीनस 7 मार्स के मैरिनर4 से मैरीनर 9 फोबोस से लेकर अन्य यानो सहित बग्गि गाड़ियों, स्वचालित रोबोट व जानकारी जुटाने वाले तस्वीरो के अनेकों यंत्रों को इन ग्रहों मे उतार कर कई पुरानी बातों का खंडन कर चुके है साथ ही अंतरिक्ष मे बढ़ते इंसानी कदम व हाल ही मे भारतीय मूल की महिला सदस्य सहित अंतरिक्ष मे घूमने गए पर्यटको ने ब्रमांड मे जीवन के सबूत, नई दुनिया के तलाश व ब्रह्मांड के रोमांच को और भी अधिक बढ़ा दिया है।

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