किच्छाः कोरोना की फर्जी रिपोर्ट देने वाले 8 आरोपी गिरफ्तार

किच्छाः कोरोना की फर्जी रिपोर्ट देने वाले 8 आरोपी गिरफ्तार

किच्छाः कोरोना की फर्जी रिपोर्ट देने वाले 8 आरोपी गिरफ्तार

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न्यूज़ डेस्क , किच्छा ( nainilive.com )- पुलभट्टा थाना अंतर्गत उत्तराखंड की सीमा पर कोरोना की फर्जी जांच कर फर्जी रिपोर्ट देने का मामला प्रकाश में आया है। शिकायत के बाद प्रशासन की टीम ने छापामार कार्यवाही करते हुए भारी मात्रा में यूज की हुई रैपिड एंटीजन टेस्ट किट बरामद कर कब्जे में ले ली। फिलहाल कार्यवाही के बाद पुलिस प्रशासन ने आठ लैब कर्मचारियों को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। फर्जी रूप से करोना की जांच किए जाने की शिकायत मिलने के बाद सीएमओ डीएस पंचपाल ,एसडीएम नरेश चंद्र दुर्गापाल ,चिकित्सा अधीक्षक एचसी त्रिपाठी सहित प्रशासन की टीम ने उत्तराखंड की सीमा पर स्थित कोविड जांच केंद्र पर छापामार कार्यवाही की ।

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जांच के दौरान सीमा पर कोविड सक्रमण जांच केंद्र कुंभ मेला हरिद्वार 2021 का बैनर देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि रजिस्टर के अनुसार 106 लोगों के सैंपल तथा जांच की गई थी, परंतु सही मायने में मात्र 6 लोगों के सैंपल की जांच कर उन्हें रिपोर्ट दी गई थी जबकि अन्य लोगों को फर्जी तरीके से रिपोर्ट जारी कर दी गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोविड जांच की जिम्मेदारी स्टार इमेजिंग पैथ लैब प्राइवेट लिमिटेड को दी गई थी और एक टेस्ट की एवज में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लैब संचालक को 354 रुपए की धनराशि अदा की जाती है इसी धनराशि को बढ़ाने के उद्देश्य से लैब संचालक ने यूज़ की गई किटों का सहारा लेकर फर्जी रूप से रिपोर्ट जारी करने का खेल शुरू कर दिया।

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प्रशासन को शिकायत मिली थी कि लैब कर्मचारियों द्वारा उत्तराखंड में प्रवेश कर रहे लोगों के कोरोना जांच के लिए नाक से स्लाइड किट के माध्यम से सैंपल लेने के बाद स्लाइड को कूड़ेदान में डाला जा रहा है और फर्जी तरीके से जांच रिपोर्ट जारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा पकड़े गए 8 आरोपियों में से कोई भी आरोपी लैब टेक्नीशियन एवं डिप्लोमा धारक नहीं है जबकि उनके द्वारा प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की सैंपलिंग कर कोविड जांच की जा रही थी। चर्चा के अनुसार पकड़े गए आरोपियों को छुड़वाने के लिए सत्ता पक्ष के लोगों द्वारा स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने का भी काम किया गया और उत्तराखंड के एक कैबिनेट मंत्री के नाम से भी आरोपियों को छोड़ने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया गया।

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