बहुप्रतीक्षित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा

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रेल लाइन निर्माण में खर्च होंगे 6967 करोड़ रुपऐ, बनेंगे 276 पुल और 72 सुरंगें

न्यूज़ डेस्क , हल्द्वानी ( nainilive.com )- रेलवे बोर्ड ने प्रस्तावित टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है। रेलवे बोर्ड के परियोजना और निगरानी निदेशक पंकज कुमार ने 18 जून को रेल विकास निगम के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक को भेजे पत्र में 154.58 किमी लंबी प्रस्तावित लाइन का प्रारंभिक सर्वे पूरा होने की जानकारी दी है।


इस रेल लाइन के निर्माण के लिए 873 करोड़ रुपये की 958 हेक्टेयर जमीन की दरकार होगी। परियोजना को मूर्त रूप देने में 276 पुल और 72 सुरंगों की जरूरत होगी। रेल लाइन के निर्माण में प्रति किमी 45 करोड़ की दर से कुल 6967 करोड़ रुपये खर्च होंगे। रेलवे बोर्ड के निदेशक (प्रोजेक्ट) के इस पत्र को रेल मंत्री के एलान के तौर पर देखा जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे पूरा होने के बाद परियोजना का विस्तृत सर्वे तथा रेल लाइन के निर्माण की ओर कदम बढ़ गए हैं। हालांकि यह भविष्य के गर्भ में है कि केंद्र सरकार रेल लाइन की उपादेयता के लिहाज से भारी-भरकम खर्च कर निर्माण कराने में कितनी इच्छाशक्ति दिखाता है।

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उल्लेखनीय है कि प्रथम विश्वयुद्ध से पूर्व 1888-89 तथा 1911-12 में अंग्रेजी शासकों ने तिब्बत तथा नेपाल के साथ सटे इस पर्वतीय क्षेत्र के लिए आर्थिक-सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रगति, भू-राजनैतिक उपयोगिता और प्रचुर वन सम्पदा व सैनिकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए रेल लाइन का सर्वे किया था। लेकिन प्रथम विश्वयुद्ध के बाद उपजे हालातों के चलते यह योजना खटाई में पड़ गई। आजाद भारत की सरकारों में इस बहुद्देशीय रेल लाइन का निर्माण का मुद्दा हाशिए पर रहा। वर्ष 2012 के रेल-बजट में पर्वतीय राज्य के जन आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप प्रस्तावित टनकपुर -बागेश्वर रेलवे लाइन को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा देते हुए देश की चार रेल राष्ट्रीय परियोजनाओं में शामिल किया गया था। हाल ही में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से दिल्ली में मुलाकात कर प्रस्तावित रेल लाइन की मंजूरी देने और टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे कराने की मांग की थी। 2004 से बागेश्वर-टनकपुर रेल मार्ग निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले क्षेत्रवासी आंदोलन की अलख जगाए हुए है। वर्ष 2008 से लेकर लगातार तीन सालों तक जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन तक हो चुके हैं।

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रेल निर्माण से सामरिक समेत होंगे कई बहुद्देशीय लाभ


प्रस्तावित रेल लाइन 1909-10 में स्थापित टनकपुर स्टेशन से बागेश्वर तक शारदा (काली) व सरयू के समानांतर उतार-चढाव एवं मोडदार पथ पर स्टेशनों एवं पुलों पर लगभग 137 किमी लंबी होगी। करीब 67 किमी रेल लाइन चीन व नेपाल की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के समानांतर होगी। इससे सैनिक गतिविधि की निगरानी, सेना एवं भारी सैन्य सामग्री के लाने-ले जाने में उपयोग होगा। साथ ही पंचेश्वर बांध के निर्माण के लिए तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा, पूर्णागिरि धाम, उच्च हिमालयी क्षेत्र के ग्लेशियरों में पर्यटन व आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिये भी यह मील का पत्थर साबित होगी। इससे प्रदेश की करीब 55 लाख जनता को प्रत्यक्ष-परोक्ष लाभ मिलेगा।

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