आज दिनांक 22 सितंबर दिन सोमवार को मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी
आचार्य पंडित प्रकाश जोशी–
शुभ मुहूर्त-:
आज यदि प्रतिपदा तिथि की बात करें तो 52 घड़ी 10 पल अर्थात अगले दिन यानी 23 सितंबर प्रातः 2:56 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र 13 घड़ी 20 पल अर्थात प्रातः 11:24 बजे तक है। शुभ योग 34 घड़ी 47 पल अर्थात शाम 7:59 बजे तक है। आज चंद्र देव पूर्ण रूपेण कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। यदि घट स्थापना के मुहूर्त की बात करें तो प्राप्त है 6:09 बजे से प्रातः 8:09 बजे तक घट स्थापना का शुभ मुहूर्त है।
मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं। उनकी एक मार्मिक कहानी है।
मां शैलपुत्री की कथा-:
एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, भगवान शंकर को नहीं। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि सारे देवताओं को निमंत्रित किया गया है, उन्हें नहीं। ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है।
सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब घर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। भगवान शंकर के प्रति भी तिरस्कार का भाव है। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को क्लेश पहुंचा।वे अपने पति का यह अपमान न सह सकीं और योगाग्नि द्वारा अपने को जलाकर भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं।पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।
पूजा विधि-:
सबसे पहले मां शैलपुत्री की तस्वीर स्थापित करें और उसके नीचे लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं। इसके ऊपर केशर से ‘शं’ लिखें और उसके ऊपर मनोकामना पूर्ति गुटिका रखें। तत्पश्चात् हाथ में लाल पुष्प लेकर शैलपुत्री देवी का ध्यान करें।
मंत्र इस प्रकार है-
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नमः।
मंत्र के साथ ही हाथ के पुष्प मनोकामना गुटिका एवं मां के तस्वीर के ऊपर छोड़ दें। इसके बाद प्रसाद अर्पित करें तथा मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जप कम से कम 108 करें।
ध्यान मंत्र-:
वन्दे वांच्छित लाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम् । वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥
अर्थात- देवी वृषभ पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।
स्तोत्र पाठ-:
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्। धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम् ॥*त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥चराचरेश्वरी त्वंहि महामोहः विनाशिन। मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम् ॥
मां शैलपुत्री की कृपा आप हम सभी पर बनी रहे।इसी मंगल कामना के साथ आपका दिन मंगलमय हो।
आचार्य पंडित प्रकाश जोशी गेठिया नैनीताल।
नैनी लाइव (Naini Live) के साथ सोशल मीडिया में जुड़ कर नवीन ताज़ा समाचारों को प्राप्त करें। समाचार प्राप्त करने के लिए हमसे जुड़ें -

Naini Live is a news portal which provides news across Uttarakhand and Madhya Pradesh. We do provide advertisement services as well.

इन्टरनेट दिवस के अवसर पर ए.आई के सुरक्षित उपयोग एवं साइबर खतरों के बचाव के प्रति कार्यशाला का कल होगा आयोजन
मेरा युवा भारत नैनीताल द्वारा 5 दिवसीय अंतर राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का हुआ आयोजन
राष्ट्रीय स्तर भारतीय ज्ञान परीक्षा के लिए डीएसबी की छात्रा स्नेहा मुरारी का चयन
पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार के विद्यार्थियों को दिखाई गई प्रेरणादायी फिल्म ‘गोदान’