हिमालय है तो हम हैं – नौला फाउंडेशन की पहल

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न्यूज़ डेस्क, नैनीताल (nainilive.com) – हिमालय दिवस एक प्रमुख त्योहार है, उत्तराखंड निवासियों का। इस अवसर पर आइये, आज,अपने हृदय में अविरल प्रेम का सागर लिए सिर्फ सात करोड़ वर्ष का युवा पर्वत राज हिमालय को जरा करीब से देंखे, महसूस करें । कई मानव सभ्यताएं, संस्कृतियां, नदियां, ऋतुचक्र, मौसम, मानसून और इतना कुछ हिमालय की भेंट हमें मिली है, जिससे हम उऋण शायद कभी न हो सकेंगे ।

हिमालयी के वर्षा वनों मैं निकलने वाले परम्परागत जल स्रोतों स्प्रिंग से बनी से बनी नदियाँ (गाड या गधेरा ) एक जटिल वेब बनाती है जो गंगा बेसिन मैं बारहमासी जल आपूर्ति की रीढ़ है । मिश्रित जैव विविधता से परिपूर्ण जंगल न केवल पानी को संरक्षित करते है बल्कि जल सपंज को भी बनाये रखते है ।

देश में पानी की कुल जरूरत का 60 फीसदी हिमालय से ही मिलता है। मोक्षदायिनी गंगा भी हिमालय की बेटी हैं, जिनकी तराई में करीब आधी आबादी अपना जीवन गुजार रही है। बड़े बड़े समूह हिमालय का दर्द दूर करने को प्राण प्रण से लगे है। परंतु आज प्रदूषण के दर्द से चीखते पहाड़, बाजार के डर से कांपते जंगल, सिकुड़ते हिमनदों से हांफती नदियां हिमालय की नई पहचान बन रही हैं। हमने हिमालय को विकास की जंजीरें बांध दी हैं।

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मनुष्य के दंभ में हिमालय की आत्मा कुचली गयी है, हमे यह महसूस करना होगा कि हिमालय प्रकृति की एक जिंदा इकाई है। हिमालय एक सामान्य मनुष्य की तरह व्यवहार करता है और अपनी उम्र के साथ घट-बढ़ सकता है। हिमालय दुनिया की सबसे नई पर्वत श्रृंखला है और इसका भी क्षरण होना है।

आइये, हम सब संकल्पित हों, की पर्वत राज हिमालय के बारे में एक नई सोच स्थापित करें, जिसमें समाज और सरकार का समन्वय हो, वृहद हिमालय नीति की नींव शीघ्र रखी जाय, जिसमें जल जंगल, और जमीन के तहत हिमालय की सामाजिक, आर्थिक, परिस्थितिक, जैव विविधता, व सांस्कृतिक पहलुओं पर कुछ विशेष नियम बनाये जाएं, जिनका किसी भी प्रकार का उल्लंघन दण्डनीय हो। सच मानिए हिमालय की मौत हुई तो यह देश का अस्तित्व क्या बचेगा? जिस प्रकार गाय की आंखे निर्दोष होती है, उसी प्रकार निर्दोष खड़ा है हिमालय, आज 15 करोड़ से ज्यादा का पर्यटन व्यापार देता है हिमालय, बदले में हम क्या वापस करते है, ये आज का महत्वपूर्ण प्रश्न है, हम ही हैं गुनहगार। हिमालय की हलचलें अच्छी नहीं, ज्यादा अनुचित विकास का समुचित विकल्प ढूंढिये क्योंकि वह अभी भी वक्त है। इसे यूं ही मत छेड़िए। हिमालय है तो हम हैं। हम सबको ये भी समझना होगा कि हिमालय मैं रहने वाले हितधारक स्थानीय समुदायों के अपने कुछ जरुरते हिमालय से ही जुड़ी है ।

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नौला फाउंडेशन जैव पारिस्थितिकी के साथ पहाड़पानी परम्परा के संरक्षण, उत्तराखंड के प्राकृतिक नौले-धारों स्रोतों के संरक्षण, पर्यावरणीय प्रबन्धन, प्रशिक्षण और सूचना कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए कटिबद्ध है । हिमालय के इन्हीं परम्परागत जल स्रोतों नौले धारे एवं स्थानीय पारिस्थितिकीय जैव विविधता को बचाने के लिए आप सभी प्रकृति प्रेमी सादर आमंत्रित हैं I कार्यक्रम मैं ग्राम प्रधान योगेश भट्ट, महेंद्र बनेशी, भुपेंद्र बिषट, गणेश कठायत, नारायण रावत, ललित बिषट, प्रकाश काहला, कटंरमैन जमुना प्रसाद तिवारी । कार्यक्रम के विशेष अतिथि व नौला प्रशिक्षक पर्यावरणविद गजेन्द्र पाठक व महिला सशक्तिकरण की पहचान कमला कैडा ने स्थानीय समुदायों की परस्परा सहभागिता पर ज़ोर दिया ।

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