पालिकाध्यक्ष के आमरण अनशन को लेकर पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विधायक संजीव आर्य पर खड़े किए सवाल

पालिकाध्यक्ष के आमरण अनशन को लेकर पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विधायक संजीव आर्य पर खड़े किए सवाल

पालिकाध्यक्ष के आमरण अनशन को लेकर पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विधायक संजीव आर्य पर खड़े किए सवाल

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संतोष बोरा , नैनीताल ( nainilive.com )- शासन से नगर पालिका को बजट आवंटित नही किए जाने को लेकर पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी सहित सभी सभासद नगर पालिका प्रांगण में बीते एक सप्ताह से धरने पर बैठे हुए थे। मांग नही माने जाने पर रविवार को आठवे दिन से पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी आमरण अनशन पर बैठ गए है।

पालिकाध्यक्ष के आमरण अनशन को लेकर पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विधायक संजीव आर्य पर खड़े किए सवाल
पालिकाध्यक्ष के आमरण अनशन को लेकर पूर्व विधायक सरिता आर्य ने विधायक संजीव आर्य पर खड़े किए सवाल

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बता दे कि जिसके बाद क्षेत्रीय विधायक संजीव आर्य ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है। कि शासन से नगर पालिका नैनीताल को प्रतिमाह एक करोड़ 21 लाख 76 हजार रुपए यानी कि 6 माह में 7.30 56 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा है जबकि नगर पालिका वेतन व पेंशन आदि पर प्रतिमाह एक करोड़ दस लाख रुपये खर्च करती है। ऐसे में नगर पालिका अध्यक्ष का कर्मचारियों को वेतन ना दे पाना और शासन को दोषी ठहराना सरासर गलत है।

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जवाब में पालिकाध्यक्ष सचिन नेगी का कहना है कि हमें प्रतिमाह एक करोड 21 लाख की ग्रांड शासन से आती है। जिसमे से 1करोड़ 16 लाख पालिका कर्मचारियों को 15 लाख संविदा व आउटसोर्सिंग की तनख्वा पर खर्च होता है और 34 लाख पेंसन। कुल एक करोड़ 62 लाख प्रति माह तनख्वा व पेंसन पर खर्च किया जाता है।कोरोनकाल में पालिका की आउटसोर्सिंग से होने वाली आय बिल्कुल बंद हो चुकी है।

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आज नैनीताल की पूर्व विधायक व महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सरिता आर्य ने कहा कि संजीव आर्य भाजपा और सरकार का बचाव कर रहे है। वो गलत आंकड़े पेश कर रहे है। उन्होंने कहा कि विधायक जमीनी हकीकत जाने बिना आंकड़ों की बाजीगरी ना पेश न करे जबकि ऐसे वक्त में उनको नैनीताल का विधायक होने के नाते नैनीताल की जनता के हित व पालिका हित को ध्यान में रखते हुए पालिकाध्यक्ष के अनशन को समर्थन करना चाहिए था क्योंकि नैनीताल की जनता ने ही उनको विधायक बनाया है।

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उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के चलते पालिका वित्तीय संकट से जूझ रही है। और उनके आय के दरवाजे भी पूरी तरह से बंद पड़े है। ऐसे में सरकार को पक्षपात नहीं करते हुए नैनीताल नगर पालिका को बजट देना चाहिए जिससे कि पालिका अपने कर्मचारियों की तनख्वाह व पालिका के खर्चे बहन कर सके.

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