उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल द्वारा मनाया गया दल का स्थापना दिवस

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नैनीताल ( nainilive.com )- उत्तराखंड क्रांति दल नैनीताल द्वारा दल का स्थापना दिवस धूम गरिमामय ढंग से मनाया गया . दल की स्थापना 25 जुलाई 1979 को हुई थी। राज्य अतिथि सभागार मैं आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता दल के संस्थापक सदस्य अम्बा दत्त बवाड़ी द्वारा की गयी। सभागार मैं उपस्थित पार्टी कार्यकर्ताओ द्वारा राज्य निर्माण मैं सर्वोच्च सहादत देने वाले शहीदो, दिवंगत दल के संस्थापक सदस्यो के चित्रों पर पुष्पाज़ली अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। ज्ञातब्य है कि आज ही के दिन अमर स्वतंत्रता सेनानी श्रीदेव सुमन की पुण्यतिथि भी है, दल द्वारा श्रीदेव सुमन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भी स्मरण करते हुऐ उनकी सर्वोच्च सहादत को याद किया।

कार्यक्रम की शुरुआत इन्दर सिंह नेगी द्वारा गिरीश तिवारी “गिरदा “के जन गीत से हुई व पृथक राज्य आंदोलन मैं गिरदा के योगदान के प्रति कृतज्ञता वयक्त कर याद किया। इस अवसर पर एक विचार गोष्ठी आयोजित की गई जिसका विषय था उत्तराखंड राज्य की अवधारना के कितने पास कितने दूर। गोष्ठी मैं विचार व्यक्त करते हुऐ पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि उत्तराखंडीओ का उत्तराखंड नहीं बना। राज्य की सारी नितिया दिल्ली की सरकारे बनाती हैं जो राज्य सरकार द्वारा प्रदेश पर थोप दी जाती हैं जबकि राज्य हित मैं क़ानून बनाने की ताकत हमारी हमारी चुनी हुई विधान सभा के पास है। यही कारण है 85 प्रतिशत पर्वतीय क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना सरकार नहीं दे सकी और शिक्षा, चिकत्सा और रोजगार के लिए पलायन जारी है। मूल निवास का मुद्दा जस का तस है, राजधानी का मुद्दा और सख्त भू क़ानून भी सरकार न दे सकी। उत्तराखंड क्रांति दल दर्द से पैदा हुआ दल है दल के मुद्दे स्पष्ट हैं कभी भी दल ने मुद्दों से समझौता नहीं किया। राज्य के नियोजन के केंद्र मैं दल कहीं नहीं है सारा कंट्रोल सरकार के पास है भ्रष्टाचार चरम पर है और आज इस ईमानदार राज्य की तुलना बिहार से की जाती है। दिल्ली की सरकारों के धन कुबेर राज्य मैं घातक राजनीति कर रहे हैं। परिसिमन से 85 प्रतिशत भू भाग की राजनीतिक ताकत कम हुई है जिस कारण बुनियादी जरूरतों का विस्तार नहीं हुआ व विकास रुक गया है। सरकार पहाड़ से संस्थानों को अन्यत्र स्थान्तारित कर रही है अभी हाई कोर्ट के स्थान्तरण की बात हो रही है जो सैधान्तिक और कानूनी रूप से गलत है। दल का मानना है यदि कार्यालय शिफ्ट करने हैं तो स्थाई राजधानी गैरसैण मैं किये जाए। डॉ जंतवाल ने दिल्ली के छात्रों के आंदोलन मैं की गई बर्बरता व दमन की निंदा की, उन्होंने कहा ज्यादती की जांच कर दोषिओ को दण्डित करना चाहिए व सरकार ने छात्रों से माफ़ी मांगनी चाहिए।

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प्रकाश चंद्र पांडे, लोकेश वर्मा, चेतन नेगी ने पर्यावरण व बुनियादी सेवावो की बदहाली पर चिंता व्यक्त की। डॉ सुरेश नेगी ने कहा स्व राज्य तो मिल गया स्व राज की अब लड़ाई है सरकार की नाकामी से पहाड़ से सब्सिडी लेकर उद्योग मैदान मैं लग रहे हैं जिससे पलायन बड़ा है, प्रति व्यक्ति आय घटी है। पहाड़ की राजनीतिक, आर्थिक व सामाजिक ताकत घटी है। उत्तराखंड राज्य के 85प्रतिशत भू भाग को संविधानिक सुरक्षा की आवश्यकता है जिस प्रकार अन्य पूर्वत्तर राज्यों को है।

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सभा को वरिष्ठ अधिवक्ता प्रकाश पांडे, त्रिभुवन फर्तियाल, सुबोध कुमार, पान सिंह सीज़वाली आदि ने सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन कमलेश चंद्र पांडे ने किया। कार्यक्रम मैंनगर अध्यक्ष मनोज साह, मनोज जोशी, पुष्कर बिष्ट, चंद्र प्रकाश साह, सुनील कुमार प्रगति साह, ध्यान सिंह, कैलाश बहुखंडी, सुबोध कुमार, अनिल कुमार, विजय साह ने दल की सदस्यता ग्रहण की। कार्यक्रम मैं खीम राज बिष्ट, मदन बगड़वाल, पान सिंह सीज़वाली, प्रकाश आर्य, श्रीमती लीला बोरा,सज़्ज़न साह आदि उपस्थित थे।

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