दुखद समाचार : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी का निधन

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Dehradun ( nainilive.com )- उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी का निधन हो गया है। वह बीते कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे—पहली बार 2007 से 2009 तक और फिर 2011 से 2012 तक। उनके कार्यकाल में सुशासन, पारदर्शिता और विकास को विशेष महत्व मिला. वह उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतू खंडूरी भूषण के पिता थे। उनके पुत्र मनीष खंडूरी ने उनके निधन का दुखद समाचार सोशल मीडिया पोस्ट में दिया।

भुवन चंद्र खंडूरी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में मेजर जनरल के पद तक सेवा दी और बाद में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में सक्रिय हुए. खंडूरी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे—पहली बार 2007 से 2009 तक और फिर 2011 से 2012 तक। उनके कार्यकाल में सुशासन, पारदर्शिता और विकास को विशेष महत्व मिला. वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री भी रहे, और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत से उनका नाम जुड़ा हुआ है.

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भुवन चंद्र खंडूरी को एक सख्त, अनुशासित और सिद्धांतवादी नेता माना जाता था । उत्तराखंड की राजनीति में उनकी छवि एक ईमानदार प्रशासक की रही, जिसने उन्हें जनता और पार्टी दोनों में अलग पहचान दिलाई.

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उनके निधन का समाचार मिलते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर फ़ैल गयी। सूबे के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने वभावभिनि श्रद्धांजलि अर्पित की . उन्होंने लिखा – ” उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।

श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।

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राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। “

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