पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जन्तवाल ने स्व विपिन त्रिपाठी जी की पुण्यतिथि पर दी विनम्र श्रद्धांजलि

पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जन्तवाल ने स्व विपिन त्रिपाठी जी की पुण्यतिथि पर दी विनम्र श्रद्धांजलि

पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जन्तवाल ने स्व विपिन त्रिपाठी जी की पुण्यतिथि पर दी विनम्र श्रद्धांजलि

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न्यूज़ डेस्क , नैनीताल ( nainilive.com )- उक्रांद के वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे पूर्व विधायक स्व. विपिन त्रिपाठी जी की आज 17विन पुण्यतिथि हैं, ऐसे में उनके सहयोगी रहे नैनीताल के पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जंतवाल ने उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की हैं। अपने सन्देश में उन्होंने कहा है की – आज जब हम विपिन त्रिपाठी जी को उनकी 17वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सादर नमन कर रहे हैं तो, उनके साथ काम कर चुके सभी लोगों के लिए यह अत्यंत भावुक क्षण है। उनका अनन्त यात्रा को प्रयाण ऐसे समय में हुआ, जब वे उत्तराखंड क्रांति दल के एक विधायक के रूप में भी अनुकरणीय भूमिका का निर्वहन कर रहे थे! विधानसभा में भी सभी साथियों के साथ मिलकर दल एक टीम के रूप में उत्कृष्ट कार्य कर रहा था! अचानक ही उनके दिवंगत होने से हम सभी स्तब्ध रह गए, परन्तु नियति के आगे सभी को नतमस्तक होना पड़ता है।

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विपिन त्रिपाठी जी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि, किसी भी कार्य को आधे अधूरे मन से करने में उनका विश्वास नहीं था!उनका जीवन वास्तव में जनता को ही समर्पित रहा, ब्यक्तिगत व सार्वजनिक जीवन पूरी ईमानदारी से जिया। अपने क्षेत्र में लोगों की आवश्यकताओं व विकासात्मक कार्यो को अग्रगति प्रदान करवाने के लिए अपने को पूरी तरह झौककर ही अभूतपूर्व उपलब्धियां प्राप्त करने में सफलता प्राप्त की।

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वन आंदोलन में अग्रणीय भूमिका का पूर्ण समर्पण के साथ निर्वहन किया, इसी प्रकार नशे के खिलाफ लड़ाई में भी अग्रिम पंक्ति में रहे। देश में जब लोकतंत्र की लौ को धूमिल करने की कोशिश हुई तो, देश के दूरस्थ क्षेत्र से युवा त्रिपाठी इसके खिलाफ अदम्य साहस के साथ खड़े हो गये, इसी कारण आपातकाल में सबसे अधिक समय तक जेल में रहने वालों में शुमार रहे। ईमानदारी का आलम यह था कि, इसके बाद भी चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर ,दल के प्रत्याशियों के लिए पूरी ताकत से प्रचार में जुट गए। राज्य आंदोलन में उनकी प्रखर भूमिका सदैव याद रहेगी।

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आज के परिपेक्ष्य मेंजब वे हमारे बीच में नहीं है, तो उनके विचारों, संवेदनशीलता व अदम्य साहस से जनता के सवालों के लिए लड़ने वाले , बेहतर बदलाव की चाहत रखने वाले, सभी को उनके जज्बे से प्रेरित होना होगा। चाहे सशक्त भू-कानून बनाने की बात हो, गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाने का प्रश्न हो, पलायन के दंश को रोकने के लिए आज की आवश्यकतानुसार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना हो व रोजगार के अवसरों को तेजी से बढाने सहित, इमानदार कार्य संस्कृति के लिए निर्णायक संघर्ष छेड़ने का संकल्प लेना ही त्रिपाठी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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