उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने सरकारी व्यवस्था के प्रति जवाबदेही तय करने की करी मांग

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न्यूज़ डेस्क , नैनीताल ( nainilive.com )- उत्तराखंड कार्मिक एकता मंच ने सरकारी व्यवस्था के प्रति जवाबदेही तय करने की मांग की है। मंच के अध्यक्ष रमेश चंद्र पांडे ने कहा कि इस एक हफ्ते में कार्यालयों को बंद करने और फिर खोलने को लेकर जो अलग-अलग आदेश जारी हुए उससे जाहिर है कि आपदा के इस नाजुक दौर में सरकार व्यवस्था का क्रियान्वयन कराने में किस कदर असमंजस की स्थिति में है । उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को कार्मिकों के जान की परवाह नहीं है यदि होती तो गोल्डन कार्ड के रूप में उन्हें खोटा सिक्का नहीं देती। उन्होंने इस खोटे सिक्के के एवज में जनवरी से कार्मिकों के वेतन से की जा रही कटौती को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की है ।

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पांडे का कहना है कि कुछ ही दिन पहले सरकार ने आपदा प्रबंधन के तहत कोरोनाकाल में कर्फ्यू लगाने जैसे निर्णय के लिए डीएम को अधिकृत किया था । इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अलग-अलग शासनादेशों के जरिए कार्यालयों को तीन तीन दिन तक बंद करने के बाद खोलने के आदेश हुए। एक ही दिन में पहले कार्यालय बंद करने और फिर खोलने के आदेश जारी हुए।

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एकता मंच के अध्यक्ष रमेश चंद्र पाण्डे का कहना है कि सामान्य प्रशासन को यह अधिकार है ही नहीं क्योंकि यह विषय केंद्र व राज्य सरकार के कानून से विनियमित है, जिसके प्रवृतन (लागू) का अधिकार आपदा प्रबंधन के पास है । ऐसे में डीएम के आदेश अर्ध न्यायिक हैं और कोई भी कार्यकारी आदेश अर्ध न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी/निरस्त नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले से जो हास्यास्पद स्थिति बनी है उसके लिए जवाबदेही तय करने के साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना भी जरूरी है कि आखिर सरकार को ऐसी लुटिया डुबाने वाली सलाह देने वाले कौन है ?

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कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में राजकाज की सुचारूता को बनाये रखना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए और देश, काल व परिस्थिति के अनुसार सुचारुता बनाने के लिए कार्मिक तैयार हैं। लेकिन व्यवस्था को तार तार करते हुए ऐसे हास्यास्पद व तुगलकी आदेश जारी करके अगर सरकार काम के लिए दबाव बनाएगी तो वह कारगर नहीं होगा।

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